December 26, 2010

किसे आवाज दूँ

किसको आती है मसीहाई किसे आवाज दूँ
बोल खूंखार तन्हाई किसे आवाज दूँ

चुप रहूँ तो हर नफ़स ड्सता है नागन की तरह
आह भरने में है रुसवाई किसे आवाज दूँ

उफ़ खामोशी की ये आहें दिल को भरमाती हुई
उफ़ ये सन्नाटे की शहनाई किसे आवाज दूँ


जोश मलीहाबादी



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