अब वही हर्फ़-ए-जुनून सब की जुबां ठहरी है
जो भी चल निकली है वो बात कहाँ ठहरी है
आज तक शैख़ के इकराम में जो शय थी हराम
अब वही दुश्मन-ए-दीन राहत-ए-जान ठहरी है
है खबर गर्म की फिरता है गुरेजां नासेह
गुफ्तगू आज सर-ए-कू-ए-बुतां ठहरी है
है वही आरिज-ए-लैला वही शीरियन का दहन
निगाह-ए-शौक घड़ी भर को यहाँ ठहरी है
वस्ल की शब थी तो किस दर्जा सुबक गुजरी थी
हिज्र की शब है तो क्या सख्त-गराँ ठहरी है
बिखरी एक बार तो हाथ आई कहाँ मौज-ए-शमीम
दिल से निकली है तो कब लब पे फुगां ठहरी है
दस्त-ए-सय्याद भी आज़िज है कफ-ए-गुलचीं भी
बू-ए-गुल ठहरी ना बुल-बुल की जबां ठहरी है
आते आते यूँ ही दम भर को रुकी होगी बहार
जाते जाते यूँ ही पल भर को खिजां ठहरी है
हम ने जो तर्ज़-ए-फुगां की है कफस में इजाद
'फैज़' गुलशन में वो तर्ज़-ए-बयान ठहरी है
फैज़ अहमद फैज़
January 23, 2011
December 30, 2010
दुःख फ़साना नहीं के तुझ से कहें
दुःख फ़साना नहीं के तुझ से कहें
दिल भी माना नहीं के तुझ से कहें
आज तक अपनी बेकली का सबब
खुद भी जाना नहीं के तुझ से कहें
एक तू हर्फ़ आशना था मगर
अब ज़माना नहीं के तुझ से कहें
बे -तरह दिल है और तुझ से
दोस्ताना नहीं के तुझ से कहें
ऐ खुदा दर्द -ऐ -दिल है बख्शीश -ऐ -दोस्त
आब -ओ -दाना नहीं के तुझ से कहें
अहमद फ़राज़
दिल भी माना नहीं के तुझ से कहें
आज तक अपनी बेकली का सबब
खुद भी जाना नहीं के तुझ से कहें
एक तू हर्फ़ आशना था मगर
अब ज़माना नहीं के तुझ से कहें
बे -तरह दिल है और तुझ से
दोस्ताना नहीं के तुझ से कहें
ऐ खुदा दर्द -ऐ -दिल है बख्शीश -ऐ -दोस्त
आब -ओ -दाना नहीं के तुझ से कहें
अहमद फ़राज़
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दिल में किस दर्जा बेदिली है अभी
दिल में किस दर्जा बेदिली है अभी
हर खुशी जैसे अजनबी है अभी
फिर बढे हैं क़दम तेरी जानिब
तेरे गम में भी दिलकशी है अभी
[जानिब =towards/in the direction of]
मैं भी तुझ से बिछड़ के सर-गर्दां
तेरी आँखों में भी नमी है अभी
[सरगर्दां =distressed]
मैं ने माना बहुत अन्धेरा है
फिर भी थोड़ी सी रोशनी है अभी
हर खुशी जैसे अजनबी है अभी
फिर बढे हैं क़दम तेरी जानिब
तेरे गम में भी दिलकशी है अभी
[जानिब =towards/in the direction of]
मैं भी तुझ से बिछड़ के सर-गर्दां
तेरी आँखों में भी नमी है अभी
[सरगर्दां =distressed]
मैं ने माना बहुत अन्धेरा है
फिर भी थोड़ी सी रोशनी है अभी
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December 26, 2010
इस का गिला नहीं
इस का गिला नहीं की दुआ बे-असर गई
इक आ़ह की थी वो भी कहीं जा के मर गई
ए हमनफ़स ना पूछ जवानी का माजरा
मौज-ए-नसीम थी, इधर आई उधर गई
मौज-ए-नसीम - wave of gentle breeze
दाम-ए-गम-हयात में उलझा गई उम्मीद
हम ये समझ रहे थे कि एहसान कर गई
दाम-ए-गम-ए-हयात- Net of sorrows of life
इस ज़िन्दगी से हमको ना दुनिया मिली ना दीन
तकदीर का मुशाहिदा करते गुज़र गई
दीन - Religion
मुशाहिदा - Inspection
बस इतना होश था मुझे रोज़-ए-विदा-ए-दोस्त
वी़राना था नज़र में जहां तक नजर गई
हर मौज आब-ए-सिंध हुई वक्फ-ए-पेच-ओ-ताब
"महरूम" जब वतन में हमारी खबर हुई
आब-ए-सिंध - Water of river sindh
वक्फ-ए-पेच-ओ-ताब - Extremely angry
त्रिलोक चंद महरूम
इक आ़ह की थी वो भी कहीं जा के मर गई
ए हमनफ़स ना पूछ जवानी का माजरा
मौज-ए-नसीम थी, इधर आई उधर गई
मौज-ए-नसीम - wave of gentle breeze
दाम-ए-गम-हयात में उलझा गई उम्मीद
हम ये समझ रहे थे कि एहसान कर गई
दाम-ए-गम-ए-हयात- Net of sorrows of life
इस ज़िन्दगी से हमको ना दुनिया मिली ना दीन
तकदीर का मुशाहिदा करते गुज़र गई
दीन - Religion
मुशाहिदा - Inspection
बस इतना होश था मुझे रोज़-ए-विदा-ए-दोस्त
वी़राना था नज़र में जहां तक नजर गई
हर मौज आब-ए-सिंध हुई वक्फ-ए-पेच-ओ-ताब
"महरूम" जब वतन में हमारी खबर हुई
आब-ए-सिंध - Water of river sindh
वक्फ-ए-पेच-ओ-ताब - Extremely angry
त्रिलोक चंद महरूम
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किसे आवाज दूँ
किसको आती है मसीहाई किसे आवाज दूँ
बोल ए खूंखार तन्हाई किसे आवाज दूँ
चुप रहूँ तो हर नफ़स ड्सता है नागन की तरह
आह भरने में है रुसवाई किसे आवाज दूँ
उफ़ खामोशी की ये आहें दिल को भरमाती हुई
उफ़ ये सन्नाटे की शहनाई किसे आवाज दूँ
जोश मलीहाबादी
बोल ए खूंखार तन्हाई किसे आवाज दूँ
चुप रहूँ तो हर नफ़स ड्सता है नागन की तरह
आह भरने में है रुसवाई किसे आवाज दूँ
उफ़ खामोशी की ये आहें दिल को भरमाती हुई
उफ़ ये सन्नाटे की शहनाई किसे आवाज दूँ
जोश मलीहाबादी
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